UPPSC परीक्षा के दौरान तनाव से बचने का व्यावहारिक कदम

Uppsc परीक्षा के दौरान अक्सर यह देखा जाता है की इस कठिन परीक्षा के समय अभ्यर्थी मानसिक अवसाद,तनाव या बोझिलता के शिकार हो जाते हैं.वे नीरसता, निराशा व भय के माहौल को अपने आसपास निर्मित कर लेते हैं. जबकि इस परीक्षा में जितना आप सकारात्मक व प्रसन्नचित रहेंगे उतना आप बेहतर कर पाएंगे. पढाई के दौरान कुछ ऐसे संकल्पों को हर अभ्यर्थी हो करना चाहिए जो उनके मन-मष्तिष्क के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व को भी बेहतर करे.

आइए, बात करते हैं 10 ऐसे संकल्पों की, जो हर युवा अभ्यर्थी के लिए प्रेरक हो सकते हैं, और जिन्हें व्यवहार में उतारना ज़्यादा मुश्किल भी नहीं है:-

  1. जीवन में ‘निरंतरता’ को अपनाने की कोशिश करें। कोई अच्छा काम या अच्छी आदत शुरू करके उसे जारी रखना भी सीखें।
  2. हल्की सी मुस्कान हमेशा बनाए रखें। इससे आपको मुसीबत का सामना करने और नित आगे बढ़ते जाने में मदद मिलेगी।
  3. आज की ख़ुशी को आज ही मनाना सीखें। ख़ुशियों को कल पर न टालें। वर्तमान में जीने की आदत  डालें, अतीत से सीखते रहें और भविष्य की दिशा में क़दम बढ़ाते जाएँ।
  4. छोटे-छोटे लक्ष्य बनाए और उनके पूरा होने पर मिलने वाली ख़ुशियों को महसूस करें। इन छोटी-छोटी ख़ुशियों को सेलिब्रेट करना न भूलें।
  5. नए साल में दूसरों के विचारों का सम्मान करने की आदत विकसित करें। ‘अनेकांतवाद’ से उपजे धैर्य और सहिष्णुता जैसे गुण आपके व्यक्तित्व की मेच्योरिटी को बढ़ाएँगे। विचारों की अति (extreme) से बचते हुए ‘मध्यम मार्ग’ अपनाएँ।
  6. भरपूर पुरुषार्थ करें पर परिणाम को लेकर बहुत ज़्यादा चिंतित न हों। नतीजों में आसक्त न होकर ‘निष्काम कर्मयोग’ को विकसित करने का अभ्यास करें।
  7. नए दोस्त बनाएँ पर पुराने रिश्तों को भी निभाना सीखें। ‘लाख मुश्किल ज़माने में है, रिश्ता तो बस निभाने में है।’ परिवार और दोस्तों के साथ ‘क्वालिटी टाइम’ बिताएँ।
  8. एक-दूसरे के काम आएँ और परस्पर सहयोग की आदत विकसित करें। तत्वार्थ सूत्र में लिखा भी है- ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम’.
  9. कोशिश करें कि किसी ज़रूरतमंद की मदद कर पाएँ। ‘Joy of Giving’ यानी देने के सुख का कोई मुक़ाबला नहीं है। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने पर आपको जो संतोष मिलेगा, वह अतुल्य है। मिसाल के तौर पर, वक़्त मिलने पर वंचित बच्चों को पढ़ाना उनके जीवन में बदलाव ला सकता है।
  10. अपनी रूचियों/शौक़/ हॉबीज़ को जिएँ। हमेशा कुछ नया सीखने की ललक बनाए रखें। सीखने में हिचकिचाएँ नहीं और श्रेष्ठ विचारों को सभी दिशाओं से आने दें। ऋग्वेद में लिखा भी है- ‘आ नो भद्रा क्रतवो यंतु विश्वत:।’

ये उपर्युक्त दस संकल्प रातोंरात विकसित नहीं होंगे। इन्हें अभ्यास में लाएँ, फिर देखिए, आपका जीवन कितना ऊर्जावान, सुखमय और सहज होता जाएगा। इसलिए हमेशा व्यस्त रहें व मस्त रहें.

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