ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल को यथासीघ्र ठीक करने की आवस्यकता है

महामारी से एक बात यह निकल कर आयी है कि भारत को ग्रामीण क्षेत्रों में अपने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को फिर से देखने और नवीनीकृत करने की आवश्यकता है.

AFP

COVID-19 और Mucormycosis की लगातार दो लहरों ने हमें काफी नुकसान पहुँचाया है। हमें कई समस्याओं व परेशानियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन महामारी की दूसरी लहर के दौरान सबसे ज्यादा संघर्ष हमारे ग्रामीण लोगों को करना पड़ा है। वे शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की प्रमुख भूमिका विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के सिद्धांत द्वारा नियमित व निर्देशित व्यापक स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को प्रदान करना है, जिसके तहत “यह सुनिश्चित करना कि सभी लोगों की आवश्यक पर्याप्त गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाओं (रोकथाम, प्रचार, उपचार, पुनर्वास और उपशमन सहित) तक पहुंच होने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना कि इन सेवाओं के उपयोग से उपयोगकर्ता को वित्तीय कठिनाई का सामना न करना पड़े ”।

आंकड़ें गिरावट दर्शाते हैं:

कोरोनावायरस महामारी की दूसरी लहर ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त और खराब स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को उजागर किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा 23 जुलाई, 2019 को राज्यसभा में साझा किया गया तथ्य बताता है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 29,337 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) की आवश्यकता है; जबकि भारत में केवल 25,743 यूनिट्स है, जो 3,594 यूनिट्स की कमी को दिखाता है। इसका मतलब है कि हमारे पास भारत के 25 गांवों के लिए एक PHC है। इस पर दोबारा गौर करने की जरूरत है। तेजी से बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य में, हमारे पास प्रत्येक 10 गांवों के लिए कुछ बिस्तरों और अन्य न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के प्रावधान के साथ एक विस्तारित PHC होना चाहिए। हमारे पास 7,322 की आवश्यकता के मुकाबले केवल 5,624 ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHCs) हैं। CHCs पर डेटा, जो 80,000 लोगों से 1.20 लाख लोगों की आबादी को कवर करने वाले रेफरल केंद्र के रूप में कार्य करता है, यह दर्शाता है कि मौजूदा CHCs की आवश्यकता की तुलना में इसमें कुल मिलाकर 81.8% विशेषज्ञों की कमी है। मानव विकास रिपोर्ट 2020 के अनुसार, भारत में 10,000 लोगों की आबादी के लिए महज़ 8 हॉस्पिटल बेड हैं, जबकि चीन में इतने ही लोगों के लिए 40 बेड हैं।

हरियाणा की तस्वीर:

अगर मैं हरियाणा में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे के बारे में बात कर सकता हूं, जो 1966 तक पंजाब का पिछड़ा इलाका रहा है, तो मेरे मुख्यमंत्री बनने अर्थात 2005 तक सार्वजनिक क्षेत्र में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। 2014 तक के अपने कार्यकाल के दौरान हमने स्वास्थ्य सेवाओं पर बहुत जोर दिया; कई निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों के अलावा, एक राज्य स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, चार मेडिकल कॉलेज (मेवात, करनाल, फरीदाबाद और नूंह में) और महिलाओं के लिए एक मेडिकल कॉलेज (सोनीपत जिले के ग्रामीण क्षेत्र में) स्थापित किए गया जिसे भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज फॉर विमेन कहा जाता है, यह देश के उत्तरी हिस्से में दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के बाद दूसरा महिला मेडिकल कॉलेज है। हमने झज्जर जिले के भादसा गांव में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-द्वितीय और एक राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की भी स्थापना की।

फिर भी, हरियाणा को काम कर रहे मौजूदा 2,666 के मुकाबले 5,070 उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) ; वर्तमान में 531 के मुकाबले 845 PHCs और वर्तमान में 118 के मुकाबले 253 CHCs की आवश्यकता है। 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा की जनसंख्या 2.53 करोड़ है। और, एक लाख आबादी के प्रत्येक ब्लॉक के बाद आवश्यक मानदंडों के अनुसार, हरियाणा को पूरे राज्य के लिए 253 सीएचसी और 845 पीएचसी की आवश्यकता है। जब हरियाणा जैसे प्रगतिशील और समृद्ध राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचा इतना खराब है, तो अन्य राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे की अपर्याप्तता का आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है (http://haryanahealth.nic.in/).

यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हर जगह सरकारें ग्रामीण जीवन पर महामारी के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए पंचायतों, ग्राम सभा, अधिसूचित क्षेत्र समितियों, नगर निकायों और गैर-सरकारी संगठनों जैसे सभी प्रकार के ग्रामीण सामुदायिक संगठनों के साथ संलग्न हों। उस उद्देश्य के लिए, हरियाणा में, हमने सभी सीएचसी, पीएचसी के लिए स्वास्थ्य कल्याण समितियों(SKSs) का गठन किया, जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर कामकाज को सुनिश्चित करने में लोगों की भागीदारी को सक्षम करने वाला एक प्रभावी प्रबंधन ढांचा साबित हुआ है।

Worldometers.info के अनुसार, भारत की 139 करोड़ आबादी में से कम से कम 91 करोड़ लोग 649,481 गांवों में रह रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में कम से कम 10% लोग ऐसे हैं जो आंशिक रूप से गांवों में भी बसे हुए हैं क्योंकि वे अक्सर अपने ग्रामीण आवासों में जाते रहते हैं। गांवों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है। भारत में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के खतरनाक अनुपात को देखते हुए, हम अब और खाली नहीं बैठ सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदा स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। COVID-19 की दो लहरों और देश में Mucormycosisके प्रसार के बाद यह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण क़दमों में से एक है। अच्छी तरह से दक्ष व बेहतर स्वास्थ्य मशीनरी की कमी के कारण, हमारे अधिकांश लोग एनसीडी जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों की चपेट में होने के बाद भी अनजान हैं, जो महामारी में काफी महत्व रखता है।

स्वास्थ्य नेटवर्क

डब्ल्यूएचओ के एक अनुमान के अनुसार, हृदय रोग, पुरानी सांस की समस्याओं और कैंसर सहित एनसीडी वैश्विक स्तर पर सभी मौतों में से लगभग 41 मिलियन (71%) और भारत में सभी मौतों में से लगभग 5.87 मिलियन (60%) का कारण बनते हैं। उन सभी का इलाज करना मानवीय रूप से संभव नहीं है, जिससे इतने बड़े पैमाने पर अकाल मृत्यु होती है। इस तरह की रुग्णता वाले व्यक्ति महामारी के मामले में सबसे अधिक सुभेद्य होते हैं।

मैं इस बात से सहमत हूं कि कोई भी कार्य कहने में आसान है, लेकिन इसे पूरा करना होगा। हमारे पास स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए प्राथमिक स्तर पर ही बीमारी के इलाज करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। यह हमें बहुत सारा धन और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च किए जा रहे संसाधनों को बचाने में भी मदद करेगा। यदि हमारे एसएचसी प्रभावी ढंग से काम करते हैं, तो पीएचसी पर दबाव कम होगा। यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ठीक से काम करते हैं तो सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों आदि पर न्यूनतम दबाव होगा। दुर्भाग्य से, हम स्वास्थ्य देखभाल के नेटवर्क की जीवंतता और जीवन शक्ति को बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं। नतीजतन, हमारी विशाल ग्रामीण आबादी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य हस्तक्षेपों से वंचित रहती है।

SHCs, PHCs और CHCs की श्रृंखला हमारे लोगों की कई स्वास्थ्य आवश्यकताओं की बहुत अच्छी तरह से देखभाल कर सकती है। उनके पास अपने-अपने क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े होने चाहिए। यह उन्हें माध्यमिक या तृतीयक देखभाल क्षेत्र में जाने वालों की संभावना वाले लोगों की पहचान करने में सक्षम करेगा। नियमित स्वास्थ्य शिविर हमें उन लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे जो तपेदिक, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थितियों के कारण होने वाली किसी भी बीमारी के पनपने के कगार पर हैं। विशेषज्ञों से लैस एक सीएचसी या रेफरल सेंटर अगर कुशलता से काम करने के लिए बनाया जाए तो यह चमत्कार करेगा। प्रत्येक सीएचसी में ‘इनडोर मरीजों के लिए कम से कम 30 बेड, ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, एक्स-रे मशीन, पैथोलॉजिकल लैबोरेटरी, स्टैंडबाय जनरेटर’ और अन्य साधन होने चाहिए। ज़रा सोचिए कि अगर SHCs, PHCs और CHCs का हमारा नेटवर्क कुशलतापूर्वक काम कर रहा होता तो COVID-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में हमें कितनी राहत मिलती।

सामूहिक जिम्मेदारी

अंत में, मैं केवल सभी हितधारकों से ग्रामीण क्षेत्रों में हमारे स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को फिर से देखने और नवीनीकृत करने और उन्हें बेहतर तरीके से बनाने का आग्रह करूंगा। चूंकि 65% से अधिक जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, इसलिए हम उनकी स्वास्थ्य आवश्यकताओं की उपेक्षा नहीं कर सकते। डब्ल्यूएचओ के अपने मानदंड और मानक हैं। हमारे पास अपना हो सकता है, शायद डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित किए गए से भी बेहतर। हम यह भी जानते हैं कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सभी लोगों की न केवल राज्य या केंद्र की जिम्मेदारी रहे, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी भी होनी चाहिए। सिर्फ पैसा खर्च करने से हम कहीं नहीं पहुंच सकते। हमें यह देखना और सुनिश्चित करना है कि खर्च किया जा रहा पैसा सुविधाओं में सुधार करे और लोगों के जीवन को आसान बनाने में योगदान दे। यह एक कार्य के रूप में बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमें अपनी रणनीतियों, उनके क्रियान्वयन और कठोर ऑडिटिंग को मजबूत करना होगा ताकि हम न केवल इस महामारी का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए बल्कि अपने ग्रामीण लोगों को स्वस्थ बनाने के लिए भी हमेशा तैयार रहें। हमें यह याद रखना चाहिए कि जब तक हम सभी जीवित नहीं रहेंगे तब तक कोई नहीं बचेगा। जैसा कि बर्ट्रेंड रसेल ने कहा है, “यह सह-अस्तित्व है या कोई अस्तित्व नहीं है।”

-भूपिंदर सिंह हुड्डा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और हरियाणा विधानसभा

में विपक्ष के नेता हैं

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