झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग

चर्चा में क्यों है ?

हाल ही में झारखंड सरकार द्वारा ,झारखंड वनांचल आंदोलनकारी आयोग का नाम बदलकर  झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितीकरण आयोग कर दिया गया है |

पृष्टभूमि

  • क्रांतिकारी आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती पर 15 नवंबर 2000 को झारखंड एक अलग राज्य बना , लेकिन इसके लिए लंबे समय तक एक आंदोलन चला , जिसमें कई आंदोलनकारीयों ने अपने जीवन के बहूमूल्य समय जेलों में बिताए तथा कई  आंदोलनकारीयों ने आंदोलन के दौरान अपनी जान भी गंवाई थी|
  • झारखंड को अलग नया राज्य बनाए जाने के लिए जिन लोगों ने आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उन्हें अब राज्य सरकार सम्मानित करते हुए नौकरी और पेंशन भी देगी|
  • जिन लोगों ने इस आंदोलन में अपनी जान गंवाई, उनके परिजनों के लिए भी यह योजना लागू रहेगी.
  • झारखंड के आंदोलनकारियों और उनके परिवारों को सम्‍मान देने के लिए झारखंड सरकार द्वारा वर्ष 2012 में एक संकल्‍प पत्र जारी कर झारखंड वनांचल आंदोलनकारी आयोग का गठन  किया गया था.

आयोग का स्वरूप

  • इस आयोग के अध्यक्ष अखिल भारतीय सेवा के रिटायर्ड अफसर होंगे
  • इस हेतु सेवानिवृत्त IPS अधिकारी श्री दुर्गा उरांव को इसका अध्य्क्ष नियुक्त किया गया
  • यह आयोग त्रिस्तरीय होगा आयोग के सदस्यों का चयन राज्य सरकार करेगी इस संबंध में गृह विभाग ने संकल्प जारी कर दिया है
  • गृह विभाग द्वारा संकल्प के तहत आयोग का कार्यकाल 1 वर्ष का होगा
  • आंदोलनकारियों की पहचान को लेकर अंतिम निर्णय का अधिकार गृह विभाग के पास होगा

लाभ प्राप्त करने  हेतु प्रावधान

  • आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग अथवा जेल में मृत या 40% दिव्यांग हुए आंदोलनकारीयों के परिवार के एक आश्रित को शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप थर्ड और फोर्थ ग्रेड के पद पर सीधी नियुक्ति दी जाएगी.
  • थर्ड और फोर्थ ग्रेड के पदों पर आंदोलनकारी के आश्रितों को नौकरी हो इसके लिए राज्य सरकार सरकारी नौकरी में 5% आरक्षण का प्रावधान करेगी.
  • यह लाभ आंदोलनकारी के आश्रित को एक ही बार मिलेगा |
  • आश्रित की श्रेणी में आंदोलनकारी की पत्नी, पुत्र ,अविवाहित पुत्री, पुत्र की विधवा के अलावा पौत्र और पौत्री भी शामिल होंगे .
  • अगर किसी आंदोलनकारी की मौत जेल में हुई है तो उनके एक आश्रित को जीवन काल तक पेंशन दिया जाएगा
  • जो आंदोलनकारी 3 महीने तक जेल में रहे हो ,उनको प्रतिमाह ₹3500 पेंशन दिया जाएगा |
  • जो आंदोलनकारी 6 महीने तक जेल में रहे हो उनको प्रति महीना ₹5000 पेंशन दिया जाएगा |
  • और जो आंदोलनकारी 6 महीने से ज्यादा जेल में रहे हो उन्हें प्रति माह ₹7000 पेंशन दिया जाएगा |
  • जिन आंदोलनकारियों की पहचान होगी उन्हें सरकार की तरफ से प्रमाण पत्र और एक प्रतीक चिन्ह भी दिया जाएगा.

आयोग के समक्ष चुनौतिया

अब तक आवेदन करने वाले 63 हजार से अधिक लोगों में से एक हजार से अधिक लोगों कि मौत हो गयी है ऐसे में ‘झारखंड आंदोलनकारियों’को  चिन्हित  करना अपने आप में एक चुनौति है |

कागजी प्रक्रियाएं इतनी उलझाऊ है  कि आयोग को  उन्हें निपटाने में लम्बा वक्त लग जाएगा  ऐसे में ‘झारखंड आंदोलनकारियों’ को चिन्हित करने में देरी होना लाजिमी है|

झारखंड आंदोलनकारीयों का कहना हैं कि राज्य में आंदोलनकारियों को चिन्हित करने का काम अब तक जिस गति से किया गया है वो पर्याप्त नहीं है ,ऐसे में नये आयोग द्वारा इस काम को जल्दी से पूरा करने की भी चुनौति होगी |