भारत के सतत विकास लक्ष्य सूचकांक एवं सतत विकास की व्याख्या

विषय सूची

  • परिचय
  • सतत विकास लक्ष्य और सतत विकास लक्ष्य सूचकांक
  • सतत विकास लक्ष्य सूचकांक के बारे में
  • सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2020-21 के प्रमुख निष्कर्ष
  • सतत विकास लक्ष्य सूचकांक का महत्व
  • प्रक्रियागत परिवर्तन और सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2020-21 पर उनके प्रभाव
  • भारत में सतत विकास हासिल करने में चुनौतियाँ
  • सतत विकास लक्ष्य सूचकांक और सतत विकास लक्ष्य के प्रति भारत के प्रदर्शन में सुधार के लिए सुझाव
  • निष्कर्ष

परिचय

हाल ही में नीति आयोग ने सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2020-21 जारी किया है। उसमें, भारत के समग्र सतत विकास लक्ष्य स्कोर में 6 अंकों का सुधार हुआ है जो 2019 में 60 से 2020-21 में 66 हो गया है। उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में मौजूदा सूचकांक में काफी गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट भारत में सामाजिक-आर्थिक और शासन संबंधी कमियों की ओर भी इशारा करती है।

सतत विकास लक्ष्य में भारत की प्रगति दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में दुनिया की लगभग 17% आबादी निवास करती है। वैश्विक महामारी के इस दौर में  भारत को अपने सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में कई चुनौतीयों का सामना करना पड़ सकता है।

सतत विकास लक्ष्य और सतत विकास लक्ष्य सूचकांक

  • सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को सितंबर 2015 में ‘हमारी दुनिया को बदलना : सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा,के प्रस्ताव के एक अंग के रूप में अपनाया गया था। भारत 17 एसडीजी और 169 संबद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। ये विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आयामों को व्यापक रूप से कवर करते हैं और गरीबी और भूख को उसके सभी रूपों और आयामों में समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • केंद्रीय स्तर पर, नीति आयोग को देश में एसडीजी के कार्यान्वयन की निगरानी की भूमिका सौंपी गई है।
  • इस अधिदेश के तहत, संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से नीति आयोग द्वारा 2018 में सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक लॉन्च किया गया था।
  • एसडीजी इंडिया इंडेक्स भारत की एसडीजी प्रगति और भारत के एसडीजी को वैश्विक एसडीजी के साथ संरेखित करने के लिए सेतु की तरह काम करता है।

सतत विकास लक्ष्य सूचकांक के बारे में

  • उद्देश्य: राज्यों के रूप में प्रगति,  2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति को निर्धारित करेगी। सूचकांक का उद्देश्य राज्यों के बीच सामाजिक सूचकांकों में उनके प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रतिस्पर्धा पैदा करना है।
  • कवर किए गए संकेतक: सूचकांक के तीसरे संस्करण में 115 मात्रात्मक संकेतकों पर 16 एसडीजी लक्ष्यों को शामिल किया गया है।
    • 2018 में 62 संकेतकों के साथ लगभग 13 एसडीजी लक्ष्यों को कवर किया गया था।
  • स्कोरिंग: एसडीजी सूचकांक के लिए एक समग्र स्कोर की गणना प्रत्येक राज्य/केंद्र-शासित प्रदेश के लिए 0-100 की सीमा में की जाती है, जो 16 एसडीजी में इसके समग्र प्रदर्शन के आधार पर होती है।
    • किसी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र का स्कोर जितना अधिक होगा, वह 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के उतना ही करीब होगा।
  • वर्गीकरण: राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को एसडीजी इंडिया इंडेक्स स्कोर के आधार पर निम्नानुसार वर्गीकृत किया गया है:
    • एस्पिरेंट: 0–49
    • परफ़ॉर्मर : 50–64
    • फ्रंट रनर: 65-99
    • अचीवर : 100

सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2020-21 के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत के समग्र एसडीजी स्कोर में 6 अंकों का सुधार हुआ है, 2019 में जो 60 था वो 2020-21 में 66 हो गया है।
    • ऐसा स्वच्छ जल और स्वच्छता, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा सहित अन्य सुविधाएं प्रदान करने में सुधार के कारण हुआ है।
  • श्रेणियाँ: वर्तमान में,  एस्पिरेंट और अचीवर श्रेणी में कोई राज्य नहीं है। लगभग 15 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश परफॉर्मर श्रेणी में हैं और 22 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश फ्रंट रनर श्रेणी में हैं।

स्रोत: द हिंदू

  • राज्य:
    • केरल ने 75 के स्कोर के साथ सूचकांक में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
    • इसके बाद हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु हैं, जिन्होंने 74 स्कोर प्राप्त किया है ।
  • केंद्र शासित प्रदेश: चंडीगढ़ ने 79 के स्कोर के साथ केंद्र शासित प्रदेशों में अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा, उसके बाद दिल्ली (68) का स्थान है।
  • वे क्षेत्र जिनमें सूचकांक में सुधार दिखा है: एसडीजी की निम्नलिखित श्रेणियों ने कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विकास को दर्शाया है ,यथा
    • गरीबी और भूखमरी उन्मूलन
    • सस्ती, स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता से संबंधित कदम। घरों में बिजली और खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन तक पहुंच में सुधार का अभियान इस संबंध में एक महत्वपूर्ण कारक रहा है।
  • वे क्षेत्र जिनमें सूचकांक में गिरावट देखी गई: सूचकांक में निम्नलिखित क्षेत्रों का भी उल्लेख है जिनमे विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए लॉकडाउन के कारण गिरावट देखी गयी।
    • उद्योग, नवाचार और अवसंरचना
  • अंतर-राज्यीय असमानता: एसडीजी पर उनके प्रदर्शन में दक्षिणी-पश्चिमी राज्यों और उत्तर-मध्य और पूर्वी राज्यों के बीच काफी अंतर था। यह सामाजिकआर्थिक और सुशासन अंतराल की ओर इशारा करता है। इसका समाधान न होने पर संघीय चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

सतत विकास लक्ष्य सूचकांक का महत्व

  • सूचकांक सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय संकेतक ढांचे (एनआईएफ) के साथ संरेखित 115 संकेतकों पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रगति को ट्रैक करता है
  • एसडीजी इंडिया इंडेक्स से एसडीजी को ट्रैक करने से संबंधित महत्वपूर्ण अंतराल को उजागर करने में भी मदद मिलेगी
  • इसके अलावा, यह सूचकांक भारत को राष्ट्रीय और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर उनकी  सांख्यिकीय प्रणाली को भी विकसित करने में मदद करेगा। इससे आने वाले वर्षों में सूचकांक विकसित और अधिक व्यापक हो जाएगा

सतत विकास लक्ष्य सूचकांक 2020-21 पर प्रक्रियागत परिवर्तन और उनके प्रभाव

सूचकांक ने निम्नलिखित पद्धतिगत परिवर्तन किए हैं:

  • संकेतकों में बदलाव: 2020-21 के सूचकांक ने कई आर्थिक संकेतकों को हटा दिया है, जैसे:
    • गिनी गुणांक: इस वर्ष सूचकांक ने मान्यता प्राप्त गिनी गुणांक को हटा दिया है।
    • सूचकांक ने ग्रामीण और शहरी आबादी के 40% के बीच प्रति व्यक्ति घरेलू खर्च के लिए विकास दर का उपयोग नहीं किया (इसके बजाय, सबसे कम दो संपत्ति वाले पांचवे या पंचमक में जनसंख्या के केवल प्रतिशत का  उपयोग किया है)
      • प्रभाव: इन संकेतकों को छोड़ने का मतलब है कि असमानता पर एसडीजी स्कोर पूंजी  असमानता पर महामारी के प्रभाव का आकलन करने से चूक गया होगा।
  • कुछ संकेतकों को अधिक महत्व: सूचकांक सामाजिक समानता संकेतकों को अधिक महत्व देता है जैसे कि विधायिकाओं और स्थानीय शासन संस्थानों में महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लोगों का प्रतिनिधित्व, और एससी / एसटी समुदायों के खिलाफ अपराध की रोकधाम
  • संकेतको में की जाने वाली वृद्धि भ्रम पैदा कर सकती हैं: सूचकांक में उपयोग किए जाने वाले मात्रात्मक संकेतकों की संख्या हर साल बढ़ रही है। 2018 में, सूचकांक ने 62 संकेतकों का उपयोग किया। लेकिन इस साल सूचकांक में 115 मात्रात्मक संकेतकों का इस्तेमाल किया गया।

भारत में सतत विकास प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियां

कुछ प्रमुख चुनौतियाँ हैं जो भारत को एसडीजी हासिल करने से रोकती हैं। वे हैं,

  1. सतत विकास लक्ष्यों का वित्तपोषण: एक नए अध्ययन का अनुमान है कि 2030 तक भारत में एसडीजी को लागू करने पर लगभग 14.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आएगा। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, भारत के पास SDGs को लागू करने के लिए आवश्यक धन का केवल 5% है। इसके अलावा, आवश्यक क्षेत्रों में भारत का बजटीय खर्च भी कम है। भारत स्वास्थ्य पर लगभग 1.5% और शिक्षा पर लगभग 4% खर्च करता है। यह सुधार के लिए आवश्यक स्तरों से काफी नीचे है।
  2. केवल उच्च वृद्धि और धन का पुनर्वितरण एसडीजी हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राष्ट्र एमडीजी 2014 की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च आर्थिक विकास के बावजूद, 2010 में, दुनिया के 1.2 बिलियन अति गरीब आबादी में से एक तिहाई अकेले भारत में निवास करती थी ।
  3. संसाधन खपत और व्यवहार परिवर्तन: एसडीजी हासिल करने के लिए व्यक्ति के बीच व्यवहार परिवर्तन की भी आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, जल का प्रभावी ढंग से उपयोग करना, भोजन की बर्बादी को कम करना और बचा हुआ भोजन दूसरों के साथ साझा करना आदि।
  4. बढ़ती जनसंख्या: संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक भारत की जनसंख्या 1.7 बिलियन तक पहुंच जाएगी। उस स्थिति में, देश को व्यापक पारिस्थितिक घाटे का सामना करना पड़ सकता है, भले ही संसाधन खपत का वर्तमान प्रति व्यक्ति स्तर समान रहे।
  5. महामारी प्रेरित प्रभाव: कई शोध अध्ययनों ने बताया है कि महामारी के दौरान आवश्यक क्षेत्रों में भारत की प्रगति कम हो गई है । उदाहरण के लिए, ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कोविड महामारी के समय में भारत में बढ़ती असमानताओं पर प्रकाश डाला गया है।

सतत विकास लक्ष्य सूचकांक और सतत विकास लक्ष्य के प्रति भारत के प्रदर्शन में सुधार के सुझाव

  1. सूचकांक में आवश्यक परिवर्तन: सूचकांक में प्रमुख आवश्यक संकेतक जैसे गिनी गुणांक आदि शामिल होने चाहिए।
    • सूचकांक का सरलीकरण: भारत बहुत अधिक संकेतकों की गणना करने के बजाय मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को मान्यता देने का प्रयास कर सकता है। यह सरल है और शासन में सुधार की मांग कर सकता है और अधिक जवाबदेही पैदा कर सकता है।
  2. व्यवहार में बदलाव लाना और संसाधनों की खपत को कम करना: यह एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है जिसे सरकार को करने की आवश्यकता है। स्वच्छ भारत मिशन की तरह, भारत को आबादी के बीच व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता है। इससे संसाधनों के पारिस्थितिक दोहन में कमी आएगी।
  3. पर्याप्त बजटीय खर्च बढ़ाना: सरकार को स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च को पर्याप्त स्तर तक बढ़ाना होगा।
    • भारतीय बजट 2021 का लक्ष्य तीन वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र के खर्च को 1.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत करना है। इससे पर्याप्त स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में वृद्धि होगी, ग्रामीण स्वास्थ्य में सुधार होगा और संबंधित सुधार आदि होंगे। यह एसडीजी सूचकांक जैसे शिशु मृत्यु दर, आदि में परिलक्षित होगा।

निष्कर्ष

भारतीय राज्यों को बढ़ती असमानता, गरीबी और भूखमरी को कम करने, पर्यावरण में सुधार आदि जैसे मुद्दों पर ध्यान देकर एसडीजी इंडिया इंडेक्स में अपने प्रदर्शन में सुधार करने की जरूरत है। इसी तरह, नीति आयोग को भी सूचकांक को सरल और विश्वसनीय रूप प्रदान करने के लिए कुछ परिवर्तन करने होंगे  यदि ऐसा किया जाता है, तो भारतीय राज्य/केंद्र शासित प्रदेश न केवल एसडीजी इंडिया इंडेक्स में बल्कि वैश्विक मानकों पर भी सुधार करेंगे।

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