कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग पर राष्ट्रीय मिशन

क्या है?

हाल ही में विद्युत मंत्रालय ने कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास का उपयोग बढ़ाने के लिये एक राष्ट्रीय मिशन स्थापित करने का फैसला किया है।

प्रस्तावना :

वायु प्रदूषण के मुद्दे को दूर करने और थर्मल पावर उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट्स को कम करने के लिए विद्युत मंत्रालय ने बायोमास के कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र उपयोग पर एक राष्ट्रीय मिशन स्थापित करने का फैसला किया है। इस अभ्यास से देश में ऊर्जा संक्रमण को और समर्थन मिलने की उम्मीद है और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने का लक्ष्य है। बिजली मंत्रालय ने कहा कि इस मिशन के संचालन और फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के साथ ही व्यापक रूपरेखा तय की गई है। मिशन में विद्युत मंत्रालय सचिव की अध्यक्षता में एक संचालन समिति होगी और इसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) आदि के प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारक शामिल होंगे।

प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन की अवधि न्यूनतम 5 साल होगी।

राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम लिमिटेड (NTPC) प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन में रसद और बुनियादी ढाँचा संबंधी सहायता प्रदान करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

इससे हासिल किये जाने वाले लक्ष्य:

खेत में पराली जलाने (stubble burning) से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान करना

ताप विद्युत उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना।

स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना।

उद्देश्य:

ताप विद्युत संयंत्रों से कार्बन न्यूट्रल बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा पाने के लिये बायोमास को-फायरिंग (co-firing) के स्तर को वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर उच्च स्तर तक ले जाना। बायोमास को-फायरिंग उच्च दक्षता वाले कोयला बॉयलरों में  ईंधन के एक आंशिक विकल्प के रूप में बायोमास को जोड़ने को संदर्भित करता है।

बायोमास पेलेट (Pellets) में सिलिका, क्षार की अधिक मात्रा को संभालने के लिये बॉयलर डिज़ाइन में अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधि शुरू करना।

बायोमास पेलेट एवं कृषि-अवशेषों की आपूर्ति शृंखला में बाधाओं को दूर करने और बिजली संयंत्रों तक इसके परिवहन को सुगम बनाना।

बायोमास को-फायरिंग में नियामक मुद्दों पर विचार करना।

मिशन के तहत निम्नलिखित उपसमूह भी गठित करने का प्रस्ताव है:

  • उप-समूह 1: यहबायोमास के गुणों/विशेषताओं पर शोध करने की जिम्मेदारी संभालेगा।
  • उप-समूह 2: यह चूर्णित कोयले (पीसी) वाले बॉयलरों में कोयले के साथ बायोमास की को-फायरिंग की अधिक मात्रा की खातिर पायलट परियोजना को संभालने के लिए बॉयलर डिजाइन आदि में अनुसंधान सहित तकनीकी विनिर्देश और सुरक्षा पहलुओं को पूरा करेगा।
  • उप-समूह 3: यह मिशन अवधि और संवेदीकरण कार्यक्रम के दौरान आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों को हल करेगा।
  • उप-समूह 4: यह कृषि आधारित बायोमास पैलेट और म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) पैलेट के परीक्षण के लिए नामित प्रयोगशालाओं और प्रमाणन निकायों का चयन करेगा।
  • उप-समूह 5: यह कोयलाआधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास को-फायरिंग की नियामक संरचना और अर्थशास्त्र पर गठित किया जाएगा।

कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों से प्रदूषण कम करने की पहल:

कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों के लिये कठोर उत्सर्जन मानकों को अधिसूचित किया गया है।

विषाक्त सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कटौती हेतु फ्ल्यू गैस डिसल्फराइज़ेशन (Flue Gas Desulphurization- FGD) इकाइयों को स्थापित करने के लिये उत्सर्जन मानकों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिये।

पुराने के स्थान पर सुपरक्रिटिकल इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिये कुछ शर्तों के अधीन अक्षम विद्युत संयंत्रों से नए सुपर क्रिटिकल संयंत्रों को कोयला लिंकेज के स्वचालित हस्तांतरण को मंज़ूरी दी गई।

सीवेज उपचार सुविधाओं के 50 किमी. के अंदर स्थापित ताप विद्युत संयंत्र अनिवार्य रूप से उपचारित सीवेज जल का उपयोग करेंगे।

पर्यावरण मंत्रालय ने दिसंबर 2015 में पार्टिकुलेट मैटर (PM), सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड के लिए उत्सर्जन मानदंडों को संशोधित किया था।

लाभ:

यह बायोमास पर प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में भी योगदान देगा.यह देश में ऊर्जा संबंधी बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने के हमारे लक्ष्यों में मदद करेगा।

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