A-76 : विश्व का सबसे विशाल हिमखंड

A-76

  • अंटार्कटिकामें वेडेल सागर में स्थित रॉन आइस शेल्फ (Ronne Ice Shelf) के पश्चिमी हिस्से से एक विशाल हिमखंड टूटकर अलग हुआ है, जिसको ‘ A-76’ का नाम दिया गया है। इसका आकार लगभग 4320 वर्ग किमी है जो इसे वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा हिमखंड बनाता है। हाल ही में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के कोपरनिकस सेंटिनल-1 मिशन द्वारा कैप्चर की गई उपग्रह छवियों में ‘A-76‘ को देखा गया था। सेंटिनल-1, कोपरनिकस पहल ( पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम) के तहत मिशनों में से एक है।
  • यह अब दूसरे स्थान पर मौजूद A-23A से आगे निकल गया है, जो आकार में लगभग 3,380 वर्ग किमी है और वेडेल सागर में तैर रहा है।

हिमखंड/आईसबर्ग (Iceberg):

  • एक हिमखंड वह बर्फ होती है जो ग्लेशियरों या आइसशेल्फ से टूटकर खुले जल में तैरती है। आईसबर्ग समुद्र की धाराओं के साथ तैरते हैं।
  • यूएस नेशनल आइस सेंटर(USNIC) एकमात्र ऐसा संगठन है जो अंटार्कटिक आइसबर्ग का नामकरण करता है और उन्हें ट्रैक करता है। अंटार्कटिक चतुर्थांश (Antarctic Quadrant) के अनुसार आईसबर्ग का नाम रखा गया है जिसमें उन्हें देखा जाता है।

आइसशेल्फ (Ice Shelves):

आइसशेल्फ एक प्रकार का लैंड आइस का तैरता हुआ विस्तार है। अंटार्कटिक महाद्वीप आइसशेल्फ से घिरा हुआ है। यह अंटार्कटिक प्रायद्वीप के किनारे पर ‘रॉन आइस शेल्फ’ बर्फ की कई विशाल तैरती हुई परतों में से एक है, जो महाद्वीप को भूभाग से जोड़ती है और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में फैली हुई हैं।

हिमनद का टूटना

यह एक ग्लेशियोलॉजिकल शब्द है, जिसका आशय ग्लेशियर के किनारे की बर्फ के टूटने से है। जब कोई ग्लेशियर पानी (यानी झीलों या समुद्र) में बहता है तो हिमनद का टूटना सबसे सामान्य बात है, लेकिन यह शुष्क भूमि पर भी हो सकता है, जहाँ इसे ‘शुष्क खंडन’ के रूप में जाना जाता है।

इससे सम्बंधित चिंताएँ

शेल्फ के बड़े हिस्से का समय-समय पर टूटन होना प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण इस प्रक्रिया में तेज़ी आई है। वर्ष 1880 के बाद से औसत समुद्र स्तर में लगभग नौ इंच की बढ़ोतरी हुई है और इस वृद्धि का लगभग एक-चौथाई हिस्सा ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ की परतों के पिघलने से हुआ है। वास्तव में यदि सभी देश पेरिस समझौते के तहत अपने लक्ष्यों को पूरा भी करते हैं तो ग्लेशियरों और बर्फ की परतों के पिघलने से समुद्र का स्तर दोगुना तेज़ी से बढ़ेगा। समुद्री जल स्तर के बढ़ने से द्वीपीय देशों व तटीय राज्यों को नुकसान, विभिन्न मौसमी घटनाओं में परिवर्तन, कृषि अर्थव्यवस्था को नुकसान आदि दृष्टिगत होंगी. 

अंटार्कटिका महाद्वीप से सम्बंधित तथ्य

  • अंटार्कटिका भारत सहित कई देशों द्वारा स्थापित लगभग 60 स्थायी स्टेशनों को छोड़कर निर्जन है।
  • अंटार्कटिका पृथ्वी का सबसे दक्षिणतम महाद्वीप है। इसमें भौगोलिक रूप से दक्षिणी ध्रुव शामिल है और यह दक्षिणी गोलार्द्ध के अंटार्कटिक क्षेत्र में स्थित है। यह विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा महाद्वीप है।
  • भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम एक बहु-अनुशासनात्मक, बहु-संस्थागत कार्यक्रम है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के ‘नेशनल सेंटर फॉर अंटार्कटिक एंड ओशियन रिसर्च’ के नियंत्रण में है।
  • भारत ने आधिकारिक रूप से अगस्त, 1983 में अंटार्कटिक संधि प्रणाली को स्वीकार किया।

अंटार्कटिक में भारतीय अनुसंधान स्टेशन:

दक्षिण गंगोत्री: 

यह भारतीय अंटार्कटिक कार्यक्रम के एक भाग के रूप में अंटार्कटिका में स्थापित पहला भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान बेस स्टेशन था। वर्तमान में इसकी स्थिति सिर्फ एक आपूर्ति स्टेशन के रूप में रह गयी है।

मैत्री:

अंटार्कटिका में मैत्री भारत का दूसरा स्थायी अनुसंधान केंद्र है। इसका निर्माण वर्ष 1989 में हुआ था। यह ‘शिरमाकर ओएसिस’ (Schirmacher Oasis) क्षेत्र में स्थित है। भारत में मैत्री के चारों ओर एक मीठे पानी की झील भी बनाई गई है, जिसे प्रियदर्शनी झील के नाम से जाना जाता है।

भारती:

भारती, वर्ष 2012 से भारत का नवीनतम अनुसंधान स्टेशन है। इसका निर्माण कठोर मौसम में शोधकर्त्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिये किया गया है। यह भारत की पहली प्रतिबद्ध अनुसंधान सुविधा है और मैत्री से लगभग 3000 किमी. पूर्व में स्थित है।

अन्य अनुसंधान सुविधाएँ:

सागर निधि:

वर्ष 2008 में भारत ने अनुसंधान हेतु सागर निधि पोत को शामिल किया। यह एक आइसबर्ग पोत है जो 40 सेमी. गहराई की पतली बर्फ की परत को काट सकता है और अंटार्कटिक के पानी को नेविगेट करने वाला पहला भारतीय पोत है।

अंटार्कटिक संधि प्रणाली

  • अंटार्कटिक संधि और संबंधित समझौतों को सामूहिक रूप से अंटार्कटिक संधि प्रणाली के रूप में जाना जाता है।
  • यह अंटार्कटिका के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करती है।
  • अंटार्कटिक संधि सचिवालय का मुख्यालय ब्यूनस आयर्स, अर्जेंटीना में है।

अंटार्कटिका संधि:

वर्ष 1961 में लागू हुई जिसमे वर्तमान में 53 सदस्य शामिल हैं। एक वैज्ञानिक संरक्षण क्षेत्र के रूप में अंटार्कटिका को अलग करता है. इसके प्रावधान निम्न हैं:

  • इस महाद्वीप का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये ही।
  • अंटार्कटिका में वैज्ञानिक जाँच की स्वतंत्रता और सहयोग करना।
  • अंटार्कटिका से वैज्ञानिक विश्लेषणों और परिणामों का आदान-प्रदान तथा उन्हें स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराना।

राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र

गोवा में स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र को वर्ष 1998 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास संस्थान के रूप में स्थापित किया गया था। यह देश में ध्रुवीय और दक्षिणी महासागर वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ संबंधित लॉजिस्टिक गतिविधियों के लिये संपूर्ण योजना, संवर्द्धन, समन्वय और निष्पादन हेतु नोडल एजेंसी है।

हिमाद्री: भारत ने वर्ष 2007 में आर्कटिक महासागर में अपना पहला वैज्ञानिक अभियान शुरू किया और ग्लेशियोलॉजी, एट्रोसोनिक विज्ञान और जैविक विज्ञान जैसे विषयों में अध्ययन करने के लिये जुलाई 2008 में नॉर्वे के स्वालबार्ड में “हिमाद्री” नाम से एक शोध स्टेशन खोला।

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