22 मई : अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस क्या है

हर वर्ष 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (International Day for Biological Diversity- IDB) के रूप में मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का इतिहास:

1992 में, पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन रियो डी जनेरियो, ब्राजील में जिसे “पृथ्वी सम्मेलन” के रूप में भी जाना जाता है, हुआ ,जिसमें राज्य और सरकार के नेताओं ने सतत विकास की रणनीति पर सहमति व्यक्त की. यह कहा जाता है कि सतत विकास दुनिया भर के लोगों की जरूरतों को पूरा करने का एक तरीका है और यह भविष्य की पीढ़ी के लिए पृथ्वी को स्वस्थ बनाए रखेगा. पृथ्वी शिखर सम्मेलन के दौरान हुए समझौतों में से एक जैविक विविधता पर कन्वेंशन था. 1992 में, केन्या के नैरोबी में एक सम्मेलन में जैव विविधता पर कन्वेंशन का टेक्स्ट संयुक्त राष्ट्र में अपनाया गया था. यह सम्मलेन 29 दिसंबर, 1993 को लागू हुआ और इस दिन अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस को नामित किया गया. 2001 से इसे 22 मई को मनाया जा रहा है. हर साल, अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस एक विशेष थीम पर केंद्रित होता है और उसी के अनुसार इसे मनाया जाता है.

इसके पीछे यूएनओ का मुख्य उद्देश्य यह था की विश्व में सभी लोगो को जैव विविधता के प्रति सतर्क किया जाये जिससे विश्व की जैव विविधताओं को बनी रहे और उसका संरक्षण किया जा सके। यह जैव विविधता द्वारा कई सतत विकास चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने के लिये यह एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है।

वर्ष 2021 की थीम: 

  • वर्ष 2021 में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की थीम “हम समाधान का हिस्सा हैं” (We’re Part Of The Solution) है। इस वर्ष की थीम वर्ष 2020 की थीम- “हमारे समाधान प्रकृति में हैं” (Our Solutions Are In Nature) से निरंतरता को दर्शाती है।

जैव विविधता के संरक्षण हेतु कुछ वैश्विक  पहलें:

  • जैव विविधता अभिसमय: यह जैव विविधता के संरक्षण हेतु कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है जिसे वर्ष 1993 से लागू किया गया। भारत सीबीडी का एक पक्षकार है।
  • वन्य जीवों एवं वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन: यह सार्वजनिक, निजी एवं गैर-सरकारी संगठनों को ज्ञान तथा युक्तियाँ प्रदान करता है ताकि मानव प्रगति, आर्थिक विकास और प्रकृति का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। भारत इस कन्वेंशन का सदस्य है।
  • वर्ष 2011-2020 की अवधि को UNGA द्वारा संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता दशक के रूप में घोषित किया गया ताकि जैव विविधता पर एक रणनीतिक योजना के कार्यान्वयन को बढ़ावा दिया जा सके, साथ ही प्रकृति के साथ सद्भाव से रहने के समग्र दृष्टि को बढ़ावा दिया जा सके।
  • वर्ष 2021-2030 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सतत् विकास हेतु महासागर विज्ञान दशक’ (Decade of Ocean Science for Sustainable Development) और पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली पर संयुक्त राष्ट्र दशक (UN Decade on Ecosystem Restoration) के रूप में घोषित किया गया।

जैव विविधता:

  • जैव विविधता शब्द का प्रयोग पृथ्वी पर जीवन की विशाल विविधता का वर्णन करने के संदर्भ में किया जाता है। इसका उपयोग विशेष रूप से एक क्षेत्र या पारिस्थितिकी तंत्र में सभी प्रजातियों को संदर्भित करने हेतु किया जा सकता है। जैव विविधता पौधों, बैक्टीरिया, जानवरों और मनुष्यों सहित हर जीवित चीज को संदर्भित करती है।
  • इसे अक्सर पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों की विस्तृत विविधता के संदर्भ में समझा जाता है, लेकिन इसमें प्रत्येक प्रजाति में विद्यमान आनुवंशिक अंतर भी शामिल होता है।

चिंताएँ:

  • वर्ल्ड वाइड फण्ड फॉर नेचर (World Wide Fund for Nature) द्वारा अपनी प्रमुख रिपोर्ट लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट,2020 में इस बात के प्रति चेताया गया है कि वैश्विक स्तर पर जैव विविधता में भारी गिरावट आ रही है। इस रिपोर्ट में 50 वर्षों से भी कम समय में 68 प्रतिशत वैश्विक प्रजातियों के नष्ट होने की बात  कही गई है जबकि पहले प्रजातियों में इतनी गिरावट नहीं देखी गई।

संरक्षण की आवश्यकता:

  • जैव विविधता के  संरक्षण से पारिस्थितिकी तंत्र की उत्पादकता में बढ़ोत्तरी ।
  • प्रजातियों की एक बड़ी संख्या के होने का अर्थ है, अधिक विविधता। अधिक प्रजाति विविधता सभी जीवन रूपों की प्राकृतिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।
  • जैव विविधता को वैश्विक स्तर पर संरक्षित किया जाना चाहिये ताकि खाद्य श्रृंखलाएं बनी रहें। क्योंकि इसमें परिवर्तन पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती है।

जैव विविधता के संरक्षण हेतु कुछ भारतीय पहलें:

वन्य जीव (संरक्षण ) अधिनियम,1972

जैव विविधता अधिनियम ,2002

जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय योजना

आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन ) नियम 2017

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